यण सन्धि

यण सन्धि: यदि इ, ई, उ, ऊ, और ऋ, के बाद भिन्न स्वर आए तो इ, और ई, का य, उ और ऊ का व तथा ऋ का र’ हो जाता है जैसे–
इ+अ = य—- अति+अधिक = अत्यधिक
यदि+अपि = यद्यपि
इ+आ = या—– इति+आदि = इत्यादि
अति+आचार = अत्याचार
इ+उ = यु—— उपरि+उक्त = उपर्युक्त
प्रति+उपकार = प्रत्युपकार
इ+ऊ = यू—— नि+ऊन = न्यून
वि+ऊह = व्यूह
इ+ए = ये—— प्रति+एक = प्रत्येक
अधि+एषणा = अध्येषणा
ई+आ = या——- देवी+आगमन = देव्यागमन
सखी+आगमन = सख्यागमन
ई+ऐ = यै——- सखी+ऐश्वर्य = सखयैश्वर्य
नदी+ऐश्वर्य = नदयैश्वर्य
उ+अ = व—— सु+अच्छ = स्वच्छ
अनु+अय = अन्वय
उ+आ = वा——- सु+आगत = स्वागत
मधु+आलय = मध्वालय
उ+इ = वि——– अनु+इति = अन्विति
अनु+इत = अन्वित
उ+ए = वे——— प्रभु+एषणा = प्रभवेषणा
अनु+एषण = अन्वेषण
ऊ+आ = वा——— वधु+आगमन = वध्वागमन
भू+आदि = भ,वादि
ऋ+अ = र——— पितृ+अनुमति = पित्रनुमति
ऋ+आ = रा—– मातृ+आज्ञा = मात्राज्ञा
पितृ+आज्ञा = पित्राज्ञा
ऋ+इ = रि——-मातृ+इच्छा = मात्रिच्छा
पितृ+इच्छा = पित्रिच्छा