राज्यसभा की रचना-Composition of Rajya Sabha

केन्द्र सरकार के तीन अंग है – 1. संसद ( व्यवस्थापिका ) 2. कार्यपालिका ( राष्ट्रपति, मंत्रिपरिषद व प्रधानमंत्री), 3. न्यापालिका ( सर्वोच्च न्यायालय )
भारतीय संसद संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार, संघ के लिए एक व्यवस्थापिका की व्यवस्था की गई है, जिसे संसद कहते हैं। यह व्यवस्थापिका दो सदनों ( उच्च सदन एवं निम्न सदन ) तथा राष्ट्रपति से मिलकर बनती है। भरतीय संसद के उच्च सदन को राज्यसभा एवं निम्न सदन को लोकसभा कहते हैं। इस प्रकार भरतीय व्यवस्थापिका द्धि- सदनात्मक हैं।
राज्यसभा की रचना
निर्माण 17 अप्रैल 1952
प्रथम बैठक 13 मई 1952
राज्यसभा सांसद का उच्च सदन है। संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार, राज्यसभा में प्रतिनिधियो की अधिकतमसख्या 250 हो सकती है। इनमे से 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं। ये 12 सदस्य ऐसे व्यक्ति होते हैं, जिनका साहित्य, विज्ञान ,कला अथवा सामाजिक क्षेत्र मेंविशेष सदस्य विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि होते हैं। वर्तमान राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं, जिनमें से 233 निवार्चित और 12 मनोनीत है।
प्रथम सभापति ( उपराष्ट्रपति ) श्री सर्वपल्ली राधाकृष्णन


वर्तमान सभापति (उपराष्ट्रपति ) श्री एम. वैकेया नायडू
राज्यसभा के प्रथम उपसभापति श्री एस. वी.कृष्ण मूर्ति राव
वर्तमान उपसभापति श्री हरिवंश
इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है
राज्यसभा पद पर नियुक्ति के लिए योग्यता
● वह भारत का नागरिक हो ।
● 30 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
राज्यसभा के सदस्य होने के लिए अनिवार्य है कि वह व्यक्ति भारत का नागरिक हो वह कम से कम 30 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो । संसद द्वारा निर्धारित अन्य शर्तो को भी पूरा करता हो।
राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष विधि द्वारा किया जाता है। इनका चुनाव प्रत्येक राज्य की विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर एकल संक्रमणीय मत पद्धति द्वारा होता है। राज्यसभा के कौन सा राज्य कितने सदस्य चुनेगा, यह संविधान द्वारा पूर्व निर्धारित कर दिया गया है।


राज्यसभा एक स्थायी सदन हैं।इसके एक- तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष बाद अवकाश ग्रहण करते रहते हैं और उसके स्थान पर नए सदस्य चुन लिए जाते हैं। इसके सदस्यों का निर्वाचन 6 वर्ष के लिए किया जाता है।
राज्यसभा के प्रत्येक सदस्य को 50,000 ₹ मासिक वेतन, 2000 ₹ दैनिक भत्ता ( प्रतिदिन संसद सत्र के दौरान अथवा संसदीय कमेटीयो की बैठक में सम्मिलित होने पर ) , निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, कार्यालय भत्ता, पेंशन तथा पारिवारिक पेंशन के अतिरिक्त अन्य सुविधाएं भी प्राप्त होती है, जिनमें आवास, दूरभाष तथा चिकित्सा सुविधाए आदि प्रमुख हैं।
भारत का उप-राष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन( Ex- officio ) सभापति होता है।उसे 1,25,000 ₹ प्रति माह वेतन तथा अन्य सुविधाएं भी प्राप्त होती है। राज्यसभा अपने सदस्यों में से किसी एक को अपना उप- सभापति चुनती हैं। सभापति की अनुपस्थिति में उप – सभापति ही सभापति का आसन ग्रहण करता है। राज्यसभा के सभापति सदन की बैठक का सभापतित्व करता है। वह उपयुक्त प्रश्नों पर अपना निर्णय देता है, सभा मे व्यवस्था बनाए रखता है तथा मतदान का निर्णय घोषित करना आदि कार्य सम्पन्न करता है।
राज्यसभा की शक्तियां
विधायी शक्तियां –
धन अधवा वित्त विधेयक के अतिरिक्त अन्य विधेयक संसद के किसी भी सदन में पेश हो सकते है।धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तावित हो सकता है। साधारण विधेयक तब तक पारित नहीं समझा जाएगा, जब तक वह राज्यसभा से पारित न हो जाए। जब किसी साधारण विधेयक पर गतिरोध उत्पन्न हो जाता है तब ऐसी स्थिति में दोनों सदनों की सयुक्त बैठक द्वारा उक्त विधेयक पर निर्णय लिया जाता है। इस सयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा का अध्यक्ष करता है। किंतु ऐसी स्थिति में भी लोकसभा की सदस्य सख्या अधिक होने से वही विजयी होती है। अतः राज्यसभा किसी भी विधेयक को कानून बनाने से नही रोक सकती, वह केवल विधेयक को रोककर 6 माह की देरी कर सकती है। संविधान में प्रत्येक संसोधन के लिए राज्यसभा के बहुमत की स्वीकृति होना आवश्यक है, अन्यथा संसोधन नहीं हो सकता। संविधान के अनुच्छेद 249 के अनुसार , राज्ययसभा राज्य सुुुची सम्बंधित किसी भी विषय को 2/3 बहुमत सेराष्ट्रीय महत्व का घोषित कर सकती है।इस प्रस्ताव के बाद संसद को एक वर्ष तक उस विषय पर कानून बनाने का अधिकार प्राप्त हो जाता है।राज्यसभा उसे प्रतिवर्ष एक वर्ष के लिए बढ़ा भी सकती है। यह शक्ति लोकसभा के प्राप्त नही होती है।इस प्रकार वह संसद को उस विषय पर कानून बनाने का अधिकार प्रदान कर सकती है। यह राज्यसभा के विशिष्ट अधिकार हैं।
मंत्रिपरिषद पर नियंत्रण-
सघात्मक व्यवस्था में कार्यपालिका अर्थात मंत्रिपरिषद संसद के अधीन रहकर कार्य करती है और उसके सदस्यों के लिए संसद का सदस्य होना अनिवार्य होता है।इसलिए संसद को मंत्रिपरिषद पर नियंत्रण की भी शक्ति प्राप्त है।
कार्यपालिका शक्तियां-
राज्यसभा केवल मंत्रियों से प्रश्न एवं पूरक-प्रश्न पूछ सकती है, उनके कार्य व नीति की आलोचना कर सकती है किंतु वह मंत्रिमंडल के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं कर सकती है।
निर्वाचन सम्बंधी शक्तियां-
संविधान के अनुच्छेद 54 के द्वारा संसद को निर्वाचन सम्बन्धी कुछ शक्तियां प्रदान की गई है, उदहारण के लिए राष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद सक्रियता से भाग लेती है तथा संसद के बहुमत के बिना राष्ट्रपति व उप-राष्ट्रपति की नियुक्ति होना असंभव है। उप-राष्ट्रपति का निर्वाचन तो संसद सदस्य ही करते हैं, किन्तु राष्ट्रपति के निर्वाचन में राज्यों के विधानमण्डलों के सदस्य भी भाग लेते हैं।
वित्तिय शक्तियां-
वित्त विधेयक सर्वप्रथम लोकसभा में ही पेश किया जाता है, राज्यसभा में नही। राज्यसभा अनुमोदन हेतु प्रेषित वित्त विधेयक को अधिक-से-अधिक 14 दिन के लिए रोक सकती है।वह विधेयक को पारित करे या न करे , किन्तु 14 दिन के बाद वह वित्त विधेयक राज्यसभा द्वारा भी पारित हुआ मान लिया जाता है।
न्यायिक शक्तियां-
राज्यसभा को लोकसभा के साथ राष्ट्रपति व उप-राष्ट्रपति पर महाभियोग का आरोप लगाने या उसकी जाँच करने का अधिकार है।सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के न्यायाधीशो को हटाने का अधिकार भी राज्यसभा को लोकसभा के समान ही प्राप्त है।
संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, राज्यसभा अपने उपस्थित तथा मत देने वाले सदस्यों के 2/3 बहुमत से नई अखिल भारतीय सेवाएं प्रारंभ करने का अधिकार केन्र्द सरकार को दे सकती है।यह शक्ति भी लोकसभा को प्राप्त नही है। यह राज्यसभा के विशिष्ट अधिकार हैं।


राष्ट्रपति की संकटकालीन उद्घोषणा की स्वीकृति दोनों सदनों द्वारा प्राप्त होनी विशेष रूप से आवश्यक है।यदि घोषणा उस समय की गई हो,तब लोकसभा विघटित हो गई हो, तो उस समय का राज्यसभा द्वारा स्वीकृत होना आवश्यक है।
अन्य विविध शक्तियां-
संसद को कुछ अन्य शक्तियां भी प्राप्त है, जैसे संसद के प्रत्येक सदस्य को मर्यादा के अंतर्गत स्वेच्छानुसार भाषण देने का अधिकार प्राप्त है। संसद के अंदर कोई भी सदस्य किसी भी वाद- विवाद में भाग ले सकता है । संसद को यह भी अधिकार प्राप्त है कि वह सार्वजनिक विवाद को निष्पक्ष रूप से हल करें तथा देश के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत